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Bhajan Gallery

पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो । -2
जिनके कछु और आधार नही, इनके तुम ही रखवाले हो। ।
पितु मातु सहायक……..
सब भाँति सदा सुखदायक हो, दुख दुर गुण नाशन हारे हो ।
प्रतिपाल करो प्रतिपाल करो सगरे जग को अतिशय करुणा उर धारे हो।
पितु मातु सहायक ……
शुभ शांति के तन प्रेम लिये, मन मंदिर के, उजियारे हो, इस जीवन के तुम जीवन हो, इन प्राणन के तुम प्यारे हो-2
तुम तो प्रतिपाल प्रताप हरि, के ही के अब और सहारे हो पितु मातु सहायक स्वामी सखा, तुम ही एक नाथ हमारे हो ।

सुर की गति मे क्या जानू , एक भजन करना जानू-2
अर्थ भजन का भी अति गहरा, उसको भी मे क्या जानू - 2
प्रभु प्रभु प्रभु करना जानू-2
नैना जल भरना जानू सुर की गति मे क्या जानू
गुण गाये,
गुण गाये, प्रभु न्याय ना छोडे
फिर क्यों तुम गुण गाते हो-2
मे बोला मे प्रेम दीवाना-2
इतनी बातें क्या जानू सुर की गति मे……

प्रभु मे आप ही आप भुलाया-2
देश विदेश बहोत दिन भटकया-2
अपने घर नही आया, में अपने घर नही आया
प्रभु मे आप ही आप भुलाया, प्रभुजी मे तो आप ही आप भुलाया
मेरे पाव में बेड़ी बनकर, पड़ गयी, ममता माया
तुम मुझसे कुछ दुर न थे पर, तुम तक पहुँच ना पाया
हो~~~~ तुम तक पहुँच ना पाया
प्रभु मे आप ही आप भुलाया, प्रभुजी मे तो आप ही आप भुलाया
मन मुरख किनी मनमानी, हिरा जनम गँवाया
हो मन मुरख किनी मनमानी, हिरा जनम गँवाया
तुम तो जनम जनम से मेरे-2
में ही रहा पराया ओ~~~~~ में ही रहा पराया
प्रभु मे आप ही आप भुलाया प्रभुजी मे तो आप ही आप भुलाया

ये गर्व भरा, मस्तक मेरा-2 प्रभु चरण धुल तक, झुकने दे
अहंकार विकार, भरे मन को निज नाम की माला, जपने दे
ये गर्व भरा………..
मै मन के मैल को, धो न सका ये जीवन तेरा, हो न सका-2
हा हो न सका, मै प्रेमी हूँ , इतना न झुका
गिरभी जो पडूं तो, उठने दे ये गर्व भरा……….
मैं ज्ञान की बातों में, खोया, और कर्महीन पड़कर सोया -2
जब आंख खुली, तो मन रोया जब सोये मुझ को , जागने दे
ये गर्व भरा……..
जैसा हूँ मै, खोटा या खरा, निर्दोष शरण में , आ तो गया -2
हा~~~~~, आ तो गया इक बार ये, कहदे खाली जा
या प्रीत की रीत, झलक ने दे ये गर्व भरा…...

नैया पड़ी मझदार, गुरु बिना, कैसे लागे पार ।-2
मैं अपराधी जनम को, मन में भरा विकार,
तुम दाता दुःख भंजना, मेरी करो संभार।
अवगुण दास कबीर के, बहुत गरीब नवाज, जो मैं पूत कपूत हूँ-2
तहूँ पिता की लाज गुरु बिना, कैसे लगे पार।…-2
साहिब तुम मत भूलियो, लाख लोग लग जाहीं, साहिब तुम मत भूलिये
हम से तुमरे बहुत हैं, तुम से हमरे नाही।
अन्तर्यामी एक तुम, आतम के आधार,
जो तुम छोड़ो हाथ प्रभु जी-2 कौन उतारे पार॥ गुरु बिना…….

तुम कहाँ छुपे भगवान करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||-2
दुख हरो द्वारकानाथ………..
यही सुना है दीनबन्धु तुम, सबका दुख हर लेते |
जो निराश हैं उनकी झोली, आशा से भर देते ||
अगर सुदामा होता मैं तो, दौड़ द्वारका आता |
पाँव आँसुओं से धो कर मैं, मन की आग बुझाता ||
तुम बनो नहीं अनजान, सुनो भगवान, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
दुख हरो द्वारकानाथ……….
जो भी शरण तुम्हारी आता, उसको धीर बंधाते |
नहीं डूबने देते दाता, नैया पार लगाते ||
तुम न सुनोगे तो किसको मैं, अपनी व्यथा सुनाऊँ |
द्वार तुम्हारा छोड़ के भगवन, और कहाँ मैं जाऊँ ||
प्रभु कब से रहा पुकार, मैं तेरे द्वार, करो मत देरी |
दुख हरो द्वारकानाथ शरण मैं तेरी ||
दुख हरो द्वारकानाथ…….3

जिनके हृदय श्री राम बसे, तिन और का नाम लियो ना लियो ।
कोई मांगे कंचन सी काया, कोई मांग रहा प्रभु से माया ।
कोई पुण्य करे कोई दान करे, कोई दान का रोज बखान करे ।
जिन कन्या धन को दान दियो, उन और को दान दियो ना दियो ॥
जिनके हृदय श्री राम बसे
कोई घर में बैठा नमन करे, कोई हरि मंदिर में भजन करे ।
कोई गंगा यमुना स्नान करे, कोई काशी जाके ध्यान धरे ।
जिन मात पिता की सेवा की, उन तीरथ स्नान किओ ना किओ ॥
जिनके हृदय श्री राम बसे…..

मन निग्रह देख के तेरी माया प्रभु मेरा मन ललचाया-2
कोई राव कोई रंक भिकारी, कही धूप कही छाया-2
रंग रंगीली कश्ती तेरी, मानव फिरे बुलाया
प्रभु मेरा मन ललचाया देख के तेरी माया
प्रभु मेरा मन ललचाया
सत्य मार्ग को भूल गया मे, देख के कंचन काया-2
नैन खुले तब लगा सोचने क्या खोया क्या पाया
प्रभु मेरा मन ललचाया देख के तेरी माया
प्रभु मेरा मन ललचाया अपने रूप की छवि दिखला दो
अभिलाषा हैं दर्ष करा दो -2
ज्ञान की ज्योति जला दो मन मे-2
शरण तुम्हारी आया प्रभु मेरा मन ललचाया …

छोड़ झमेला झूठे जग का-2
कह गए दास कबीर ।
पार लगायेंगे एक पल में, तुलसी के रघुवीर ॥-2
छोड़ झमेला झूठे जग…
भूल भुलयिया जीवन तेरा, साचो नाम प्रभु को ।
मन में बसा ले आज तू बन्दे, ले कर नाम गुरु को ।
ले कर नाम गुरु को ।
सूरदास के श्याम हरेंगे -2
जनम जनम की पीड़ ॥
छोड़ झमेला झूठे जग…
तेरा मेरा दिन भर करता, पर तेरा कछु ना~~~~~~~~~हीं ।-2
माटी का यह खेल है यह सारा, मिलेगा माटी मा~~~~~~हि ।-2
मीरा जी के ईश बुलाये -2
सब को यमुना तीर ॥
छोड़ झमेला झूठे जग…

रामकहिये,गोविन्दकहिये-
4करमकी गति न्यारी, संतो।-2
बड़े बड़े नयन दिए मिरगन को,
बन बन फिरत उधारी॥संतोकरम की
गति न्यारी, संतो…..।
उज्वल वरन दीन्ही बगलन को,
कोयल करदीन्हीकारी॥संतोकरम की
गति न्यारी, संतो…..
औरन दीपन जल निर्मल किन्ही,
समुंदर करदीन्ही खारी॥संतोकरम की
गति न्यारी, संतो…..
मूर्ख को तुम राज दीयत हो,
पंडित फिरत भिखारी॥संतोकरम की गति न्यारी, संतो…..
मीरा के प्रभु गिरिधर नागुण
राजा जी को कौन बिचारी॥संतोकरम की
गति न्यारी, संतो…..
बड़े बड़े नयन दिए मिरगन को,
बन बन फिरत उधारी॥संतोकरम की
गति न्यारी, संतो…..

उड़ जा रे कागा, बन का-3 मेरा
श्याम गया बहु दिन का रे … का रे
…….. का रे ……..॥-2
तेरे उड़ा सूँ राम मेलेगा, राम…….
राम……-2 धोखा भागै मनका ।-2
इत गोकुल उत मथुरा नगरी, हरि है
गाढ़े बन का ॥ उड़ जा रे
कागा बन का……2आप तो
जाए बदेसा छाए, हम बासी मधुबन
का ।-2 मीरा केप्रभु
हरिअविनासी, चरणकवल हरिजन का
॥ उड़ जा रे कागा,मेरा श्याम गया बहु
दिन का रे…… ……. का रे ……..
का रे

मन रे ! तू काहे ना धीर धरे
वो निर्मोही मोह ना जाने जिनका मोह करे
मन रे ! तू काहे ना धीर धरे
इस जीवन की चढ़ती ढलती धुप को किसने बाँधा
रंग पे किसने पहरे डाले रूप को किसने बाँधा
काहे ये जतन करे
मन रे ! तू काहे ना धीर धरे
उतना ही उपकार समझ कोई, जितना साथ निभा दे
जनम मरण का मेल है सपना
ये सपना बिसरा दे
कोई ना संग मरे
मन रे ! तू काहे ना धीर धरे
मन रे ! तू काहे ना धीर धरे
वो निर्मोही मोह ना जाने जिनका मोह करे
मन रे ! तू काहे ना धीर धरे



प्रभु का नाम जपो मन मेरे,
दूर करे वो ही संकट तेरे।
जीवन रैन बसेरा है, क्या तेरा क्या मेरा है।
दो नैनो से नीर बहे रे, दूर करे वोही संकट तेरे ॥
पिंजरा जब खुल जाता है, पंछी कब रुक पाता है।
क्यूँ इस का अफ़सोस करे, दूर करे वोही संकट तेरे॥
प्रभु का नाम जपो मन मेरे,

तू कर बंदगी और भजन धीरे धीरे ।
मिलेगी प्रभु की शरण धीरे धीरे, दमन इन्द्रियों का तू करता चला जा,
तो काबू में आएगा यह मन धीरे धीरे, मिलेगी प्रभु की शरण...
सुने कान तेरे सदा वेद वाणी ।
तू कर भागवत का श्रवण धीरे धीरे ।
मिलेगी प्रभु की शरण...
सफर अपना आसान करता चला जा तो छूटेगा आवागमन धीरे धीरे ।
मिलेगी प्रभु की शरण...
तू दुनिया में शुभ काम करता चला जा ।
तू कर शुद्ध अपना चलन धीरे धीरे ।
मिलेगी प्रभु की शरण...

मन मैला और तन को धोए-2, फूल को चाहे, कांटे बोये..कांटे बोये मन मैला और तन को धोए -2
करे दिखावा भगति का क्यों उजली ओढ़े चादरिया ।
भीतर से मन साफ किया ना, बाहर मांजे गागरिया ।
परमेश्वर नित द्वार पे आया, तू भोला रहा सोए ॥
मन मैला और तन को धोए...- 2
कभी ना मन-मंदिर में तूने, प्रेम की ज्योत जलाई ।
सुख पाने तू दर-दर भटके, जनम हुआ दुखदायी ।
अब भी नाम सुमिर ले हरी का,- 2
जनम वृथा क्यों खोए ॥
मन मैला और तन को धोए...
साँसों का अनमोल खजाना, दिन-दिन लूटता जाए ।
मोती लेने आया तट पे, सीप से मन बहलाए ।
साँचा सुख तो वो ही पाए-2, शरण प्रभु की होए ॥
मन मैला और तन को धोए... फूल को चाहे, कांटे बोये कांटे बोये ।
मन मैला और तन को धोए...

दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी, अँखियाँ प्यासी रे |
मन मंदिर की जोत जगा दो, घट घट वासी रे ||
मंदिर मंदिर मूरत तेरी, फिर भी न दीखे सूरत तेरी |-2
युग बीते ना आई मिलन की पूरनमासी रे
दर्शन दो घनश्याम…………
द्वार दया का जब तू खोले, पंचम सुर में गूंगा बोले |-2
अंधा देखे, लंगड़ा चल कर, पँहुचे काशी रे ||
दर्शन दो घनश्याम………… पानी पी कर प्यास बुझाऊँ, नैनन को कैसे समजाऊँ |
आँख मिचौली छोड़ो अब तो, मन के वासी रे ||
दर्शन दो घनश्याम…………

बरसै बुंदियाँ सावन की, सावन की मनभावन की।-2
सावन में उमग्यो मेरो मन-2
भनक सुनी हरि आवन की।
उमड़ घुमड़ चहुं दिसा से आयो-2,
दामनि दमके, झर लावन की।
बरसै बुंदियाँ सावन की,
सावन की मनभावन की।-2
आ~~~~ नन्हीं नन्हीं बूंदन मेहा बरसै-2,
शीतल पवन सुहावन की।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर-2,
आनंद मंगल गावन की।
बरसै बुंदियाँ सावन की सावन की मनभावन की।।

जो तुम तोडो पिया, मैं नाही तोडू ।-2
तोसो प्रीत तोड कृष्णा, कोन संग जोडू।।-2
तुम भये तरुवर, मैं भई पखिया।
तुम भये सरोवर, मैं तेरी मछिया॥
तुम भये गिरिवर, मैं भई चारा।
तुम भये चंदा, मैं भई चकोरा॥
जो तुम तोडो पिया,…..
तुम भये मोती प्रभु, हम भये धागा-2
तुम भये सोना, हम भये सुहागा॥
मीरा कहे प्रभु,
मीरा कहे प्रभु ब्रज के वाशी।
तुम मेरे ठाकुर, मैं तेरी दासी॥
जो तुम तोडो पिया,…..

सांवरा ~~सांवरा ~~ रे म्हारी प्रीत निभाज्यो जी, म्हारी प्रीत निभाज्यो जी हो ॥-2
सांवरा ~~रे म्हारी प्रीत.....2
सांवरा ~~रे हें छो म्हारो, गुण रो सागर-2,
अवगुण मा बिसाराजो जी।
सांवरा~~ रे म्हारी प्रीत निभाज्यो जी॥-2
लोकन सिजया मन न पतीजा-2
मुखडा सबद सुणाज्यो जी॥
सांवरा~~~ रे… म्हारी प्रीत.....2
दासी थारी जणम जणम री-2,
म्हारी आंगण आज्यो जी।
सांवरा रे… म्हारी प्रीत.....-3
मीरा रे प्रभु गिरधर नागर,
बेड़ा पार लगाज्यो जी-2
सांवरा~~~ रे… म्हारी प्रीत.....3

थाणें काईँ काईँ बोल सुनावा-2
म्हारा सांवरा गिरधारी-2
पूरब जणम री प्रीत पुराणी-2
जावणा गिरधारी म्हारा सांवरा गिरधारी……
सुंदर बदन जोवता साजन, थारी छवि बलिहारी-2
म्हारे आंगण मा, स्याम पधारो-2
मंगल गावा नारी हो मंगल गावा नारी
म्हारा सांवरा, म्हारा सांवरा गिरधारी……
मोती चौक पुरावा डेंणा, तण मण डारा वारी-2
चरण शरण री दासी मीरा री-2
जणम जणम री क्वारी-2
म्हारा सांवरा, सांवरा गिरधारी…
थाणें काईँ काईँ बोल सुनावा-2
म्हारा सांवरा गिरधारी-2
पूरब जणम री प्रीत पुराणी,-2
जावणा गिरधारी.. म्हारा सांवरा..

होजीहरिकितगये-2
नेहालगाय……-2
नेहालगायमनहरलीयो,
रसभरीटेरसुनाय।-2
मेरेमनमेंऐसीआवै-2
मरूँजहरबिसखाय।होजीहरिकितगयेने
हालगाय……-
छाड़िगयेबिसवासघातकरिगये,
नेहाकेरीनावचढ़ाय।
मीराँकेप्रभुकबरेमिलोगे,
रहेमधुपुरीछाय ।
होजीहरिकितगये…….

प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो -2
समदर्शी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो
प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो
एक लोहा पूजा मे राखत, एक घर बधिक परो -2
सो दुविधा पारस नहीं जानत, कंचन करत खरो प्रभु मेरे अवगुण चित ना धरो |
एक नदिया एक नाल कहावत, मैलो ही नीर भरो -2
जब मिलि दोनो एक बरन भये, सुरसरी नाम परो |
तन माया जो ब्रह्म कहावत, सुर सो मिल बिगरो |
करी कृपा निरधार किजिये, कर पन जात तरो |
प्रभुजी मोरे अवगुण चित ना धरो -2
समदर्शी है नाम तिहारो, चाहो तो पार करो

जब जानकी नाथ सहाय करें ,
तब कौन बिगाड़ करे नर तेरो .. 4
सुरज मंगल सोम भृगु सुत-2
बुध और गुरु वरदायक तेरो -2
राहु केतु की नाहिं गम्यता-4
संग शनीचर होत हुचेरो ..
जब जानकी नाथ सहाय करें
जब जानकी नाथ सहाय करें तब कौन बिगाड़ करे नर तेरो ..-4

घूँघट के पट खोल रे, तोहे पिया मिलेंगे -2
घूँघट के पट खोल रे, घट घट मै तोरे साईं बसत है-2
कटुक बचन मत बोल रे , तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे…2
धन जोबन का गरब ना कीजे,
झूठा इन का मोल रे, तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे…2
जाग जतन से रंग महल में-2
पिया पायो अनमोल रे, तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे…2
सूने मंदिर,सूने मंदिर दिया जला के-2
आसन से मत डोल रे, तोहे पिया मिलेंगे
घूँघट के पट खोल रे…

तेरे मन्दिर का हूँ दीपक, जल रहा-2
आग जीवन में मैं भर कर चल रहा, जल रहा
तेरे मन्दिर का हूँ दीपक, जल रहा
क्या तू मेरे दर्द से अन्जान है
तेरी मेरी क्या नयी पहचान है
जो बिना पानी बताशा ढल रहा
आग जीवन में मैं भर कर चल रहा
तेरे मन्दिर का हूँ दीपक………..
इक झलक मुझ को दिखा दे साँवरे……….. साँवरे
मुझ को ले चल तू कदम की छाँव रे……….साँवरे
और छलिया आ~~~~~~
और छलिया क्यों मुझे तू छल रहा
आग जीवन में मैं भर कर चल रहा
तेरे मन्दिर का हूँ ,दीपक जल रहा
मैं पथिक मद बाँसुरी की बाँटता
एक धुन से सौ तरह से नाचता
आँख से जमुना का पानी डल रहा
आग जीवन में मैं भर कर चल रहा
तेरे मन्दिर का हूँ ,दीपक जल रहा

बाबा मन की आँखें खोल-2 मन की आँखें खोल बाबा-2
दुनिया क्या है एक तमाशा, चार दिनों की झूठी आशा-2
पल में तोला पल में माशा-2
ज्ञान तराज़ु, लेके हाथ में, तोल सके तो तोल-2
बाबा मन की ...
मतलब की सब दुनियादारी, मतलब के सब हैं संसारी -2
जग में तेरा हो हितकारी-2
तन मन का सब जोर लगाकर नाम हरि का बोल-2
बाबा मन की ...

जरा तो इतना बता दो भगवन लगी ये कैसी लगा रहे हो
मुझी में रहकर मुझी से अपनी ये खोज कैसी करा रहे हो ।।
हृदय भी तुम हो, तुम्ही हो स्पन्दन प्रेम तुम हो, तुम्ही हो चितवन ।-2
पुकारता मन तुम्हीं को क्यों फिर तुम्हीं जो मन में समा रहे हो ।। जरा...
प्राण भी तुम हो, तुम्ही हो प्रियतम नयन भी तुम हो, तुम्ही हो मधुबन ।
तुम्हे पुकारूं, तुम्हीं को ढूंढूं-2
अजब ये लीला, करा रहे हो ।। जरा...
भाव भी तुम हो तुम्ही वंदना गीत भी तुम हो, तुम्ही हो रचना ।
स्तुति तुम्हारी, तुम्हे सुनाऊँ- । 2 यह कैसी पूजा करा रहे हो ।। जरा...
कर्म भी तुम हो, तुम्ही हो कर्ता
धर्म भी तुम हो, तुम्ही हो धर्ता ।-2
निमित्त कारण, मुझे बनाकर
ये नाच कैसा नचा रहे हो ।। जरा...

जीवन खतम हुआ तो जीने का ढंग आया -4
जब शम्मा बुझ गयी तो -2
महफ़िल में रंग आया
जब शम्मा बुझ गयी तो महफ़िल में रंग आया
गाडी निकल गयी तो,घर से चला मुसाफिर-3
मायूस हाथ मलता-2
वापिस बैरंग आया-2
जीवन खतम हुआ तो ……..-2
मन की मशीनरी ने, तब ठीक चलना सीखा-2
जब बूढ़े तन के हर इक-2
पुर्जे में जंग आया-2
जीवन खतम हुआ तो ……….2
फुर्सत के वक़्त में ना, सुमिरन का वक़्त पाया
उस वक़्त, वक़्त माँगा-2
जब वक़्त तंग आया-2
जीवन खतम हुआ तो …..2
आयु ने नत्था सिंह तब, हथियार फेंक डाले
यमराज फ़ौज लेकर-2
करने को जंग आया-2
जीवन खतम हुआ तो….2

अब सौंप दिया इस जीवन का, सब भार तुम्हारे हाथों में।
है जीत तुम्हारे हाथों में, और हार तुम्हारे हाथों में॥-2
मेरा निश्चय बस एक यही-2 एक बार तुम्हे पा जाऊं मैं-2
अर्पण कर दूँ दुनिया भर का -2 सब प्यार तुम्हारे हाथों मे-2
अब सौंप दिया इस…..
जो जग में रहूँ तो ऐसे रहूँ ज्यों जल में कमल का फूल रहे-2
मेरे सब गुण दोष समर्पित हों-2 करतार तुम्हारे हाथों में॥
अब सौंप दिया इस…..
यदि मानव का मुझे जनम मिले, तो तब चरणों का पुजारी बनू।
इस पूजक की एक एक रग का-2 हो तार तुम्हारे हाथों मे-2
अब सौंप दिया इस…..
जप जब संसार का कैदी बनू, निष्काम भाव से करम करूँ-2
फिर अंत समय में प्राण तजूं-2 निरंकार तुम्हारे हाथों मे,
अब सौंप दिया इस…..
मुझ में तुझ में बस भेद यही, मैं नर हूँ तुम नारायण हो।
मैं हूँ संसार के हाथों में संसार तुम्हारे हाथों में॥
अब सौंप दिया इस…..

जय रघुनन्दन जय सियाराम | हे दुखभंजन तुम्हे प्रणाम ||
भ्रात भ्रात को हे परमेश्वर,
स्नेह तुन्ही सिखलाते |-2
नर नारी के प्रेम की ज्योति,
जग मे तुम्ही जलाते |
ओ नैया के खेवन हारे,
जपूं मै तुमरो नाम ||
जय रघुनन्दन जय……….
तुम्ही दया के सागर प्रभु जी,
तुम्ही पालन हारे |
चैन तुम्ही से पाए बेकल,
मनवा सांझ सवेरे |
जो भी तुमरी आस लगाये,बने उसी के काम ||
जय रघुनन्दन जय……….

डगमगडगमग डोले नैया,
पारलगाओतोजानूखेवैयाचंचलचितको,
मोहनेघेरा
पग-पगपरहैपापकाडेरा-2
लाजरखोजोलाजरखैया
पारलगाओतोजानूखेवैया
डगमग डगमग……..
छायाचारोंऔरअँधेरा-2
तुमबिनकौनसहारामेरा-2
हाथपकड़केबंसीबजैया
पारलगाओतोजानूखेवैया,
डगमग डगमग……..
भक्तोंनेतुमकोमनायाभजनसे
मैंतोरिझाऊंतुम्हेअंसुवनसे
गिरतोंकोपाँवउठाओकन्हैया
पारलगाओतोजानूखेवैया,
डगमग डगमग……..